Matru Pitru Pujan Divas · Parents Worship Day
14 Februaryसुन के पुकार माता – पिताओं की, दिल से उठी उनकी आहों की, संत श्री आशारामजी बापू का हृदय भर आया, बापूजी ने एक नया दिवस चलाया, जो मातृ – पितृ पूजन दिवस कहलाया ।
14 फरवरी को पश्चिमी देशों में युवक युवतियाँ एक दूसरे को ग्रीटिंग कार्डस, फूल आदि देकर वेलेन्टाइन डे मनाते हैं । यौन जीवन संबंधी परम्परागत नैतिक मूल्यों का त्याग करने वाले देशों की चारित्रिक सम्पदा नष्ट होने का मुख्य कारण ऐसे वेलेन्टाइन डे हैं जो लोगों को अनैतिक जीवन जीने को प्रोत्साहित करते हैं । इससे उन देशों का अधःपतन हुआ है । अब यह कुप्रथा हमारे भारत में भी पैर जमा रही है । हमें अपने परम्परागत नैतिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए ऐसे वेलेन्टाइन डे का बहिष्कार करना चाहिए । इस संदर्भ में विश्ववंदनीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने की है एक नयी पहल – 'मातृ – पितृ पूजन दिवस'।
प्रौद्योगिकी का गलत उपयोग और पश्चिमी संस्कृति का नकारात्मक प्रभाव समाज को सांस्कृतिक और नैतिक पतन के गर्त में धकेल रहा है। वेलेंटाइन डे के कारण होनेवाले प्रतिकूल प्रभावों और अश्लीलता का प्रतिकार करने और वैदिक संस्कृति के मूल्यों और माता-पिता के सच्चे व पवित्र प्रेम को पुनर्जीवित करने के लिए, दूरदर्शी संत श्री आशारामजी बापू ने वर्ष 2007 में 14 फरवरी को मातृ-पितृ पूजन दिवस मनाने की शुरुआत की।
बच्चे-बच्चियाँ माता – पिता का आदर-पूजन करें और उनके सिर पर पुष्प रखें, प्रणाम करें तथा माता-पिता अपनी संतानों को प्रेम करें । बेटी माँ को तिलक करे, माँ बेटी को तिलक करे । बेटा बाप को तिलक करे, बाप बेटे को तिलक करे और माता – पिता संतानों को आशीर्वाद दें — त्रिलोचन भव । तुम्हारी बाहर की आँख के साथ भीतर की, विवेक की, ज्ञान की कल्याणकारी आँख जाग्रत हो ।
मातृदेवो भव । पितृदेवो भव । बालिकादेवो भव । कन्यादेवो भव । पुत्रदेवो भव ।
Read the full poojan vidhi →Figures as published on the earlier MPPD site.
जो अपने माता - पिता का नहीं, वह अन्य किसका होगा ! जिनके कष्टों और अश्रुओं की शक्ति से अस्तित्व प्राप्त किया, उन्हीं के प्रति अनास्था रखने वाला व्यक्ति पत्नी, पुत्र, भाई और समाज के प्रति क्या आस्था रखेगा ? ऐसे पाखण्डी से दूर रहना ही श्रेयस्कर है ।
माता - पिता एवं गुरू का त्याग करने वाला, उनकी निंदा करने वाला, उन्हें प्रताड़ित करने वाला मनुष्य समस्त वेदों का ज्ञाता होने पर भी यज्ञादि को करने का अधिकारी नहीं होता ।
माता - पिता के प्रति अश्रद्धा रखकर उन्हें अपमानित करने वाले और उनके प्रति निंदा का भाव रखकर उन्हें दुःखी करने वाले व्यक्ति का वंश नष्ट हो जाता है । उसे पितरों का आशीर्वाद नहीं मिलता ।
माता - पिता और आचार्य – ये तीन व्यक्ति के अतिगुरु (श्रेष्ठ गुरु) कहलाते हैं । इसलिए उनकी आज्ञा का पालन करना, सेवा करना, उनके लिए हितकारी कार्य करना और उनको दुःखी न करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है ।
माता - पिता और गुरुजनों का आदर करने वाला चिरआदरणीय हो जाता है । आप भी माता - पिता व गुरुजनों की आदर से सेवा करके उनके ऋण से उऋण बनें । आप आदर्श बालक बनें, संतों के आशीर्वाद आपके साथ हैं ।
14 February
14 फरवरी को माता-पिता का विधिवत पूजन करें।
मातृ-पितृ पूजन दिवस की सुरुवात पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने की।
Matru Pitru Poojan Divas, also known as Parents Worship Day, was started by Sant Shri Asharamji Bapu in 2007.
पूज्य संत श्री आशारामजी बापू द्वारा प्रेरित मातृ पितृ पूजन दिवस १४ फरवरी को है।
Get notifications for new quizzes, contest results, live satsang sessions, and replies to your posts.